महाराजा छत्रसाल जयंती 2025: बुंदेलखंड के वीर शिवाजी की गूंज आज भी प्रेरणास्त्रोत | Maharaja Chhatrasal Jayanti Special
4 मई 2025 को पूरे बुंदेलखंड में महाराजा छत्रसाल जयंती भव्यता के साथ मनाई जा रही है। छत्रसाल, केवल एक योद्धा या राजा नहीं थे, बल्कि वे भारत की स्वाधीनता, संस्कृति और आत्मसम्मान के जीवंत प्रतीक रहे हैं। आइए, इस अवसर पर जानें उनके अद्भुत जीवन, संघर्ष, और वह विरासत जो आज भी अमिट है। महाराजा छत्रसाल का जीवन परिचय: पूरा नाम: महाराजा छत्रसाल बुंदेला जन्म: 4 मई 1649 (ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया) जन्मस्थान: कच्छवाहा (वर्तमान बांदा ज़िला, उत्तर प्रदेश) पिता: वीर बुंदेला सरदार चंपतराय माता: रानी लाल कुंवरि प्रेरणा: छत्रपति शिवाजी महाराज छत्रसाल का जन्म ऐसे कालखंड में हुआ जब मुगल सम्राट औरंगज़ेब का आतंक अपने चरम पर था। उन्होंने बचपन में ही अपने पिता की वीरगति देखी और तभी से मुगलों के खिलाफ विद्रोह का संकल्प ले लिया। संघर्ष और स्वतंत्रता संग्राम 1671 में मात्र 22 वर्ष की आयु में विद्रोह का बिगुल: जब छत्रसाल ने संघर्ष की शुरुआत की, तब उनके पास मात्र 5 घुड़सवार और 25 पैदल सैनिक थे। लेकिन अद्वितीय युद्धनीति, गोरिल्ला युद्ध कौशल और जनता का समर्थन उनके सबसे बड़े हथियार बने। छत्रपति शिवाजी से प्रेरणा: छत्रसाल न...